योनि में खुजली होने पर न करें ऐसा: योनि में खुजली होती है तो गलती से भी न अपनाएं ये नुस्‍खे – vagina me khujli hone par na kare ye kaam

अक्‍सर महिलाओं को अपने जीवन में कभी न कभी योनि में खुजली होने की समस्‍या होती ही है। इस समस्‍या से छुटकारा पाने के लिए अधिकतर महिलाएं डॉक्‍टर के पास जाने से पहले घरेलू नुस्‍खों और तरीकों का इस्‍तेमाल करती हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि आपको हर नुस्‍खे से फायदा ही हो।

Published By Parul Rohatagi | 360healthyways.com | Updated:

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कई बार यीस्‍ट इंफेक्‍शन की वजह से वजाइना में खुजली और जलन महसूस होने लगती है। महिलाओं में ये आम समस्‍या है। आंकड़ों की मानें तो हर 4 में से 3 महिला अपने जीवन में कभी न कभी यीस्‍ट संक्रमण की समस्‍या से ग्रस्‍त जरूर होती हैं। इस संक्रमण के साथ ही दर्द, झुनझुनी और खुजली की वजह से अक्‍सर महिलाओं को असहजता महसूस होती है।

योनि में सूखापन या किसी केमिकल या खराब रेजर इस्‍तेमाल करने की वजह से योनि में खुजली की समस्‍या हो सकती है।

इस समस्‍या से ग्रस्‍त होने पर अधिकतर महिलाएं कई तरह के घरेलू नुस्‍खे अपनाती हैं। आपने भी कई बार सुना और पढ़ा होगा कि घरेलू नुस्‍खों से से घर पर ही यीस्‍ट इंफेक्‍शन को ठीक किया जा सकता है लेकिन आपको बता दें कि ये पूरा सच नहीं है। यहां हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्‍खों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इस्‍तेमाल योनि में संक्रमण होने पर कभी नहीं करना चाहिए।

सिर्फ दर्द नहीं देता UTI, फ्रस्ट्रेट भी बनाता है

  • सिर्फ दर्द नहीं देता UTI, फ्रस्ट्रेट भी बनाता है

    यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) केवल पेनफुल ही नहीं बल्कि फ्रस्ट्रेटिंग भी हो सकता है। वह भी खासतौर पर उस स्थिति में जब यह थोड़े बहुत समय बाद बार-बार हो रहा हो। हालांकि ऐंटिबायॉटिक्स कुछ ही दिन के अंदर इस तरह के इंफेक्शन की ठीक कर देती हैं। लेकिन जब यह वापस हो जाता है तो परेशानी सिर्फ शारीरिक ना रहकर मानसिक भी हो जाती है। यहां जानें, प्राइवेट पार्ट में बार-बार हो रहे इंफेक्शन से बचने का तरीका…

  • यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन रोकने के आसान तरीके

    यूरिन इंफेक्शन और यूरिनरी ट्रैक्ट में होनवाले इंफेक्शन से बचने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप प्राइवेट पार्ट में होनेवाली जलन को रोकने और बार-बार यूरिन आने की दिक्कत को रोकने पर काम करें। इसमें आपकी डॉक्टर ही आपकी पूरी मदद कर सकती है।

  • ऐसे होता है फायदा

    कुछ लोगों में डायबिटीज के कारण तो कुछ लोगों में अन्य वजहों से बार-बार यूरिन आने की दिक्कत होती है। ऐसा होने पर इनर्स में गीलापन और बार-बार टॉयलट सीट के संपर्क में आने पर इंफेक्शन पनपने का खतरा बढ़ जाता है।

  • जलन और बर्निंग की वजह

    जरूरी नहीं है कि अपके प्राइवेट पार्ट में जलन और बर्निंग की वजह सेहत से ही जुड़ी हो, यह आपकी हाइजीन से भी जुड़ी हो सकती है। कई बार कपड़े धोने का सोप, सर्फ या उनके सुखाने की जगह हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रही होती है। इन्हें बदलकर देखें।

  • बैक्टीरिया पनप ही नहीं पाएगा

    लिक्विड डायट लेते रहें। जैसे, जूस, सूप, पानी, ग्रीन-टी आदि। फल और सलाद भी शरीर के अंदर पानी की मात्रा को संतुलित रखने का काम करते हैं। अगर आप हर रोज जरूरत के हिसाब से लिक्विड डायट लेते रहेंगे तो ब्लेडर में बैक्टीरिया पनप ही नहीं पाएगा। क्योंकि समय-समय पर टॉइलट के जरिए आपका यूरिनरी ट्रैक्ट क्लीन होता रहेगा।

  • सही से वाइप करें

    मोशन यानी पॉटी जाने के बाद आप अपने इनर पार्ट्स को आगे और पीछे दोनों तरफ से टिश्यू पेपर की मदद से ठीक से साफ करें। यहां गीलापन ना रहने दें। आमतौर पर बैक्टीरिया एनेक्स यानी मल-मार्ग के आस-पास पनपता है और अक्सर यही बैक्टीरिया यूरेट्रा तक इंफेक्शन पहुंचने का कारण बन जाता है।

  • सेक्स और शौच

    सेक्स से पहले अपने प्राइवेट पार्ट्स को दोनों ही पार्टनर्स को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। साथ ही सेक्स के बाद यूरिन जरूर जाएं और सिंपल पानी से ही सही वॉश जरूर करें। वॉश करने के बाद टिश्यू या सॉफ्ट कॉटन फेब्रिक से पानी जरूर साफ करें।

  • बर्थ कंट्रोल के तरीके

    कपल के बीच इंफेक्शन की एक वजह बर्थ कंट्रोल के लिए अपनाए जानेवाले तरीके भी हो सकते हैं। कुछ लोगों को कॉन्डम सूट नहीं करता तो किसी को लूब्रिकेट्स, कॉपरटी जैसी चीजों से दिक्कत हो सकती है। इनमें वजाइना में गीलापन लानेवाले लूब्रिकेंट्स भी शामिल हैं।

  • डॉक्टर से मिलें

    एक बार ठीक होने के बाद ऊपर की स्लाइड्स में बताए गए तरीके फॉलो करें और इंफेक्शन से बचे रहें। अगर फिर भी इंफेक्शन हो रहा है तो आपको सही डॉक्टर को दिखाना चाहिए। हो सकता है कि सेक्स के तुरंत बाद लेने के लिए वह आपको कोई ऐंटिबायॉटिक सजेस्ट करें।

लहसुन

ऐसा माना जाता है कि लहसुन की एक कली को योनि में लगाने से योनि में मौजूद बैक्‍टीरिया संतुलित होता है और इससे फंगस को बढ़ने से रोका जा सकता है। आपको बता दें कि ये घरेलू नुस्‍खा बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। लहसुन में फंगस-रोधी यौगिक होते हैं जो कि फंगस पर काम जरूर करते हैं लेकिन इसके लिए आपको योनि में लहसुन की कली डालने का जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है।

योगर्ट

आपने कई जगह पढ़ा होगा कि योनि पर योगर्ट लगाना बहुत फायदेमंद होता है लेकिन इस बात पर आंख बंद करके भरोसा करने की जरूरत नहीं है। योगर्ट में योनि में हैल्‍दी बैक्‍टीरिया पैदा करने वाला लैक्‍टोबेसिली होता है लेकिन लैक्‍टोबेसिली के एक प्रकार यानी स्‍ट्रेन की मात्रा कम होती है। कई अध्‍ययनों में भी ये बात साबित हो चुकी है कि वजाईनल इंफेक्‍शन या योनि में खुजली होने पर इस नुस्‍खे का इस्‍तेमाल बिलकुल नहीं करना चाहिए।

कॉन्डम की वजह से हो सकती है एलर्जी

  • कॉन्डम की वजह से हो सकती है एलर्जी

    कुछ लोगों में सेक्स के दौरान कॉन्डम यूज करने से इचिंग, रेडनेस या स्वेलिंग की समस्या हो जाती है। ये सभी लेटेक्स एलर्जी के कारण हो सकते हैं। इसलिए अगर आपको ऐसी कोई भी दिक्कत सेक्स के दौरान हो तो दोबारा कॉन्डम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से जरूर मिले…

  • लेटेक्स क्या होता है?

    लेटेक्स रबर के पेड़ों की दूधिया परत से आता है। मेन्यूफेक्चर्स कॉन्डम के साथ ही कई दूसरे प्रॉडक्ट बनाने में लेटेक्स का यूज करते हैं। नेचुरल रबर लेटेक्स में प्रोटीन की मात्रा होती है, जो कई लोगों में एलर्जी का कारण बन जाता है। रिसर्च के अनुसार दुनियाभर में कॉन्डम यूज करने वाले मात्र 4.3 प्रतिशत लोगों को ही इस तरह की एलर्जी की समस्या होती है।

  • बढ़ सकती है यह एलर्जी

    अगर किसी को लेटेक्स के कारण एलर्जी हो गई है तो बार-बार कॉन्डम या लेटेक्स से बने प्रॉडक्ट यूज करने पर यह एलर्जी बढ़ भी सकती है। इसके लक्षण हर किसी में अलग-अलग लेकिन गंभीर हो सकते हैं।

  • ये होते हैं लक्षण

    लेटेक्स सेंसेटिव लोगों में सेक्स के दौरान या उसके बाद लक्षण नजर आ सकते हैं। इन्हें प्राइवेट पार्ट में जलन, खुजली, सूजन या रैशेज की समस्या हो सकती है। शुरुआत में यह हल्की होती है। लेकिन बार-बार सेक्स के दौरान कॉन्डम यूज करने के कारण यह बढ़ सकती है।

  • कुछ ऐसे भी होते हैं लक्षण

    जिन लोगों को लेटेक्स से एलर्जी होती है, उन्हें प्राइवेट पार्ट के अलावा गले में खराश, नाक से पानी आने लगना, छींके आना, अचानक खांसी उठने लगना या सांस लेने में कुछ तकलीफ महसूस होना भी शामिल है।

  • कुछ घातक लक्षण भी हैं

    कुछ लोगों में लेटेक्स का असर घातक स्तर पर देखने को मिलता है, इसे एनाफिलेक्सिस कहते हैं। यह कई बार जान पर जोखिम बनने जैसा भी हो सकता है। इन लोगों में एनाफिलेक्सिस होने पर इम्यून सिस्टम तेजी से ऐसे कंपाउड्स रिलीज करता है, जो सूजन बढ़ाते हैं और इनसे पूरे शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है। इन कंपाउंड्स को हिस्टामाइन कहते हैं।

  • एनाफिलेक्सिस के लक्षण

    इसके लक्षणों में लो ब्लड प्रेशर, जी मिचलाना, गले में खिंचाव, वॉमिटिंग, पेट दर्द,चक्कर आना जैसे लक्षणों के साथ ही कार्डिएक अटैक जैसे घातक लक्षण भी शामिल हैं। प्रभावित व्यक्ति में ये लक्षण शुरुआती स्तर पर धीमे होते हैं लेकिन धीरे-धीरे बढ़ जाते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

  • ऐसे करते हैं डाइग्नॉज

    डॉक्टर पेशंट की मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से उसका ट्रीटमेंट करते हैं। कई बार उन लोगों को लेटेक्स एलर्जी से परेशानी हो सकती है, जो लेटेक्स प्रॉडक्ट बनाने वाली कंपनियों में काम करते हैं। इस दौरान कई बार डॉक्टर आपकी स्किन से जुड़े कुछ टेस्ट भी करते हैं, जो प्रोटीन से रिलेटेड होते हैं।

नारियल तेल

यीस्‍ट इंफेक्‍शन के इलाज के लिए कई महिलाएं योनि में नारियल तेल लगाती हैं। हालांकि, इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इस नुस्‍खे से वाकई में फंगस को बढ़ने से रोका जा सकता है या नहीं।

नारियल तेल में बैक्‍टीरिया-रोधी गुण होते हैं जो कि यीस्‍ट संक्रमण पर असरकारी हो सकता है लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है। इसलिए आपको अपनी योनि में ऐसा कुछ नहीं लगाना चाहिए जिसका वैज्ञानिक रूप से कोई प्रमाण न हो।

ये भी पढ़ें : Vaginal इंफेक्शन से बचने के लिए करवाएं Fluid Transplant

आमतौर पर 3 से 4 दिनों में दर्द और खुजली अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो आपको एक बार स्‍त्री रोग विशेषज्ञ से बात कर लेनी चाहिए। इसके अलावा कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्‍यान रखकर भी आप इस समस्‍या से बच सकती हैं जैसे कि साफ रेजर का इस्‍तेमाल करना, ढीले और सूती कपड़े पहनना और ढेर सारा पानी पीना।

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