how to deal with miscarriage: मुश्किल होता है मिसकैरेज के दर्द से निकलना, ऐसे निभाएं पत्नी का साथ – how to deal with miscarriage

Published By Garima Singh | 360healthyways.com | Updated:

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पति-पत्नी के रिश्ते की सबसे खूबसूरत बात यही होती है कि वे आपस में झगड़ते भी सबसे अधिक हैं और एक-दूसरे के बिना रह भी नहीं पाते हैं। यह रिश्ता एक-दम रोलरकोस्टर राइड की तरह होता है। कभी लव की हाइप होती है तो कभी झगड़े कि लेकिन प्यार की सिर्फ गहराई होती है और इस गहराई को अक्सर तभी समझा जाता है जब दोनों किसी मुश्किल घड़ी से गुजर रहे होते हैं। मिसकैरेज कपल्स की लाइफ में आनेवाली ऐसी ही मुश्किल घड़ी है। महिलाएं इस स्थिति में अधिक डिस्टर्ब होती हैं और एक तरह का खालीपन महसूस करती हैं। ऐसे वक्त में उन्हें पति के साथ ही बहुत अधिक जरूरत होती है। यहां जानें, आप पत्नी को किस तरह मदद करें ताकि वे दुख की इस घड़ी में खुद को संभाल सकें…

समय की जरूरत

कई बार ऐसा होता है जब इंसान सबकुछ समझते हुए भी कुछ समझना नहीं चाहता और उसके दिमाग में बस एक ही चीज घूमती रहती है। ऐसी ही स्थिति होती है, उस मां की जो अपने अजन्मे बच्चे को खो देने के दुख से गुजर रही होती है। ऐसे में महिलाओं को अधिक प्यार और सपॉर्ट की जरूरत होती है। इसके लिए जरूरी है कि पति अपनी पत्नी को अधिक से अधिक वक्त दें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है कि अगर इस स्थिति में किसी महिला को उसके आंसुओं और दर्द के साथ अकेला छोड़ दिया जाए तो उसकी मानसिक सेहत पर इसका बहुत अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है।

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अकेला ना छोड़ें

ऐसी स्थिति से गुजर रही महिला के आस-पास हर समय कोई ना कोई रहना चाहिए ताकि वह खुद को अकेला ना महसूस करे। साथ ही परिवार के लोगों को इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि उनका ध्यान किसी ना किसी काम में लगाया जाए। कहीं घूमने की प्लानिंग की जाए, घर पर ही मूवी देखी जाए। घर का माहौल बदलने के लिए क्लोज रिलेटिव्स को बुलाया जाए, जो इस मुद्दे पर बात बिल्कुल ना करें…बल्कि घर का महौल पॉजिटिव बनाने में मदद करें।

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मिसकैरेज के बाद परिवार की जिम्मेदारी


स्वीकारने की जरूरत

दर्द और तकलीफ से गुजर रहे व्यक्ति के दिमाग में नकारात्मक खयाल बहुत अधिक आते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें व्यवहारिक समस्याएं होने लगती हैं। अगर आपको लगता है कि आपकी पत्नी के साथ इस तरह की चीजें हो रही हैं और आपको उनके व्यवहार में नकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं तो आपको किसी सायकाइट्रिस्ट की मदद लेनी चाहिए। इसमें झिझकने या डरने की कोई जरूरत नहीं है। शारीरिक सेहत की तरह ही मानसिक सेहत की भी अलग-अलग स्टेज होती हैं और सही समय पर ट्रीटमेंट लेने से हर दिक्कत से छुटकारा मिल सकता है।

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