pregnancy dos and donts: प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही 1-12 हफ्ते का समय है सबसे अहम और मुश्किल – first trimester of your pregnancy is most difficult and crucial

Published By Neha Seth | 360healthyways.com | Updated:

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अगर आप उन महिलाओं में से हैं जिनकी प्रेग्नेंसी बिलकुल शुरुआती स्टेज में हैं तो आपको इस दौरान अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। जी हां, प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही यानी 1 से 12 हफ्ते का समय गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे के लिए सबसे अहम और मुश्किल होता है। इसकी वजह ये है कि इन शुरुआती 3 महीनों में ही सबसे ज्यादा मिसकैरिज का खतरा रहता है। आंकड़ों की मानें तो प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में गर्भपात का खतरा 85 प्रतिशत होता है और इसीलिए इस दौरान प्रेग्नेंट महिला को केयरफुल रहने की जरूरत होती है।

सेब के साइज का होता है आपका बच्चा

प्रेग्नेंसी के शुरुआती 3 महीने में ही बच्चे की सबसे ज्यादा ग्रोथ होती है। एक छोटी सी कोशिका वाले भ्रूण से आपका बच्चा इन 3 महीनों में बढ़ने लगता है। बच्चे के हाथ-पैर, बॉडी सिस्टम और ऑर्गन्स सब इसी दौरान बनने शुरू हो जाते हैं। यहां तक की इस समय तक ब्रेन का डिवेलपमेंट भी शुरू हो जाता है। हालांकि साइज की बात करें तो इस दौरान आपका बच्चा सिर्फ 4-5 इंच बड़ा और 30-40 ग्राम यानी एक सेब के साइज का होता है। बावजूद इसके बच्चे का नर्वस सिस्टम, जेनेटिक्स, शरीर के अहम अंग, बाल, हाथ-पैर, उंगलियां सब कुछ बनने शुरू हो जाते हैं।

हेल्दी ग्रोथ के लिए न्यूट्रिएंट्स का करें सेवन

चूंकि इस दौरान बच्चे के शरीर में इतने सारे बदलाव हो रहे होते हैं लिहाजा ये बेहद जरूरी है कि आप अपने बच्चे की हेल्दी ग्रोथ के लिए उसे सही पोषक तत्व देती रहें ताकि उसके विकास में किसी तरह की दिक्कत ना हो। न्यूट्रिएंट्स यानी पोषक तत्वों की कमी और किसी भी तरह के केमिकल्स की वजह से न सिर्फ बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है बल्कि गर्भपात का भी खतरा रहता है। ऐसे में शुरुआती 3 महीने में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यहां जानें…

​चॉकलेट क्रेविंग्स

  • ​चॉकलेट क्रेविंग्स

    जहां तक बात चॉकलेट की है तो इसका प्रेग्नेंसी से कुछ खास लेना देना नहीं है। आप प्रेग्नेंट है या नहीं, हर सूरत में ज्यादातर लोगों को चॉकलेट बहुत पसंद होती है खासकर फीमेल्स को। चॉकलेट ऐसी चीज है जिसे आप कितना भी खाएं मन नहीं भरता। लेकिन कई बार प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स इतनी बढ़ जाती हैं कि बस दिल करता है हर वक्त चॉकलेट खाते रहें। लेकिन कहीं आपकी ये एक्सेस चॉकलेट होने वाले बच्चे को नुकसान न पहुंचा दे? अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं कि प्रेग्नेंसी में चॉकलेट खानी चाहिए या नहीं, तो इस बारे में यहां जानें, पूरी डीटेल…

  • ​क्या प्रेग्नेंसी में चॉकलेट खाना सेफ है?

    इस बारे में अब तक कई स्टडीज हो चुकी है जिसमें यह बात जानने की कोशिश की गई गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा चॉकलेट खानी चाहिए या नहीं। इन सभी स्टडीज में यही बात सामने आयी कि चॉकलेट, आपके होने वाले बच्चे यानी भ्रूण के ग्रोथ और विकास दोनों में मदद करती है। लिहाजा प्रेग्नेंकी के दौरान चॉकलेट खाना सेफ है, लेकिन एक लिमिट में रहकर क्योंकि चॉकलेट में कैफीन होती है और बहुत ज्यादा चॉकलेट नुकसानदेह हो सकती है। साथ ही साथ ज्यादा चॉकलेट खाने से आपकी भूख खत्म हो जाएगी और फिर आप किसी भी तरह की हेल्दी चीजें नहीं खा पाएंगी।

  • ​कितनी चॉकलेट खानी चाहिए?

    प्रेग्नेंसी के दौरान कितनी चॉकलेट खानी है ये बात पूरी तरह से आपके हेल्थ पर निर्भर करती है और इसके लिए अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें। वही बता पाएंगे कि आपके लिए चॉकलेट का सेफ लिमिट क्या है। साथ ही साथ प्रोसेस्ड चॉकलेट खाने की बजाए प्योर चॉकलेट का सेवन करें।

  • ​कौन सी चॉकलेट है बेस्ट?

    डार्क चॉकलेट ही प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बेस्ट मानी जाती है क्योंकि वह उनकी और होने वाले बच्चे की सेहत के लिए फायदेमंद है। अगर आपको मार्केट में ऐसी डार्क चॉकलेट मिल जाए जिसमें स्वीटरनर्स और रिफाइंड शुगर कम हो तो वैसी चॉकलेट आपके लिए सही रहेगी।

  • ​प्रीक्लैम्प्सिया की दिक्कत नहीं होती

    चॉकलेट खाने से न सिर्फ आपका बच्चा हेल्दी रहता है बल्कि प्रीक्लैम्पिसाया यानी प्रेग्नेंसी में अचानक ब्लड प्रेशर और प्रोटीन लेवल बढ़ने की दिक्कत भी दूर हो जाती है। साथ ही साथ प्लैसेंटा जो मां के शरीर से पोषक तत्वों को बच्चे तक पहुंचाता का फंक्शन भी बेहतर तरीके से काम करता है।

  • ​ऐंटिऑक्सिडेंट्स का सोर्स

    चॉकलेट्स में मौजूद फ्लैवनॉयड्स ऐंटिऑक्सिडेंट्स का बेहतरीन सोर्स है जो गर्भवती महिला का इम्यूनिटी लेवल सुधारने में मदद करता है।

  • ​स्ट्रेस होता है दूर

    डार्क चॉकलेट्स मूड इन्हैनसर का काम करते हैं यानी इन्हें खाने से आपका स्ट्रेस कम होता है, मूड बेहतर होता है और साथ ही साथ ब्रेन में इन्डॉर्फिन और सेरोटोनिन का लेवल भी बढ़ता है। साथ ही साथ चॉकलेट खाने से थकान भी कम होती है।

  • ​आपका बच्चा होगा हैपी

    रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में डार्क चॉकलेट खाती हैं उनका किसी भी तरह के मटरनल स्ट्रेस से बचा रहाता है और जन्म के बाद उनका बच्चा हैपी हैपी रहता है।

  • ​मिसकैरिज का खतरा कम

    हालांकि इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं लेकिन कई स्टडीज में यह बात भी साबित हो चुकी है कि प्रेग्नेंट महिलाएं जो हर दिन लिमिटेड मात्रा में चॉकलेट खाती हैं उनमें प्रेग्नेंसी से शुरुआती 3 महीने में मिसकैरिज होने का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

शुरुआती 3 महीने में क्या करें क्या नहीं

– घर का बना हुआ हेल्दी और फ्रेश खाना खाएं और बाहर की चीजें खाने से परहजे करें क्योंकि आपको पता नहीं कि उसमें किस तरह के हानिकारक रंग या अडिक्टिव्स पड़े हैं जो आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता हैं।

– बहुत की महिलाओं को इन शुरुआती 3 महीनों में बहुत उल्टी आती है और वो कुछ ठीक से खा नहीं पातीं। इसलिए एक बार में ज्यादा खाने की बजाए छोटे-छोटे पोर्शन्स में खाएं लेकिन बार-बार खाएं।

– जहां तक संभव हो हेल्दी और बैलेंस्ड डायट का सेवन करें और इस दौरान अपने कैलरी इनटेक के बारे में न सोचें क्योंकि आपको अपने वजन से ज्यादा इस वक्त बच्चे की सेहत के बारे में सोचना है।


– डॉक्टर की सलाह पर जरूरी फॉलिक ऐसिड और विटमिन सप्लिमेंट्स का भी सेवन करें।

– अच्छी नींद लें ताकि आपको थकान महसूस ना हो और आप हमेशा तरोताजा फील करें। खुद को बेवजह थकाने की जरूरत नहीं है। इस वक्त आराम ज्यादा जरूरी है।

– डॉक्टर से पूछे बिना किसी भी तरह की एक्सर्साइज शुरू न करें।

– स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, तंबाकू हर तरह की केमिकल वाली चीजों से पूरी तरह से दूर रहें।

– जिन जगहों पर वायु प्रदूषण का लेवल हाई हो वहां न जाएं और अगर कोई स्मोकिंग कर रहा हो तो उससे भी दूर रहें क्योंकि आपकी सांस के जरिए हानिकारक प्रदूषक तत्व बच्चे तक भी पहुंच सकते हैं।

– वैसे तो कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल न करना ही सेफ होगा लेकिन अगर आप चाहें तो नैचरल और हर्बल कॉस्मेटिक्स यूज कर सकती हैं जिसमें किसी तरह का कोई केमिकल ना हो।

प्रेग्नेंसी के 13वें से 21वें हफ्ते के बीच उभरते हैं स्ट्रेच मार्क्स

  • प्रेग्नेंसी के 13वें से 21वें हफ्ते के बीच उभरते हैं स्ट्रेच मार्क्स

    जी हां, प्रेग्नेंसी के 13वें हफ्ते से लेकर 21वें हफ्ते के बीच स्ट्रेच मार्क्स उभरने शुरू होते हैं और हकीकत यही है कि आप इन स्ट्रेच मार्क्स से पूरी तरह से बच नहीं सकतीं। हालांकि इन्हें कम जरूर किया जा सकता है। आपको बता दें कि स्ट्रेच मार्क्स सिर्फ टमी के आसपास के हिस्से पर ही नहीं बल्कि थाईज यानी जांघ, हिप्स, पैरों का काफ वाला हिस्सा, आर्म्स और ब्रेस्ट पर भी हो सकते हैं। डॉक्टरों की मानें तो स्ट्रेच मार्क एक तरह से घाव का निशान है जो हमारी स्किन के बहुत जल्दी फैलने या सिकुड़ने की वजह से होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान अचानक बढ़े वजन की वजह से महिलाओं को स्ट्रेच मार्क्स हो जाते हैं। मार्केट में ढेरों क्रीम्स, ऑइल और ऑइंटमेंट बिक रहे हैं जो इस बात का दावा करते हैं कि इन्हें लगाने से स्ट्रेच मार्क्स नहीं होते या फिर पूरी तरह से दूर हो जाते हैं। लेकिन हम आपको बता रहे हैं उन नैचरल चीजों के बारे में जिनका इस्तेमाल कर आप स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पा सकती हैं और वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट के।

  • ​ऑइल से करें मसाज

    शरीर के जिस हिस्से पर स्ट्रेच मार्क्स हो गए हैं वहां पर ऑइल से मसाज करने से स्किन स्मूथ हो जाती है और स्ट्रेच मार्क्स दूर करने में मदद मिलती है। आप चाहें तो इसके लिए ऑलिव ऑइल, विटमिन ई ऑइल, कैस्टर ऑइल, नारियल का तेल, बादाम का तेल आदि किसी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। तेल की कुछ बूंदें हथेली पर लें और स्ट्रेच मार्क्स जहां पर हुआ है उस हिस्से पर हल्के हाथों से मसाज करें। करीब 30 मिनट तक तेल को यूं ही लगा रहने दें ताकि स्किन तेल तो अच्छी तरह से सोख ले। मसाज करने के बाद नहा लें। ऐसा करने से स्ट्रेच मार्क्स कम करने में मदद मिलेगी।

  • ​ऐलोवेरा जेल करें यूज

    ऐलोवेरा जेल स्किन को स्मूथ बनाने के साथ-साथ अंदर से उसे रिपेयर भी करता है जिससे डैमेज कम होने लगता है और स्ट्रेच मार्क्स हटने लगते हैं। मार्केट में बिकने वाले पैकेज्ड ऐलोवेरा जेल की बजाए फ्रेश जेल यूज करें। इसके लिए ऐलोवेरा जेल को सीधे स्किन पर लगाएं और करीब 15 मिनट के लिए लगे रहने दें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। नियमित रूप से इस ऐलोवेरा जेल का इस्तेमाल करे। स्ट्रेच मार्क्स दूर हो जाएंगें।

  • ​शहद भी है मददगार

    शहद में मौजूद ऐंटीसेप्टिक प्रॉपर्टी स्ट्रेच मार्क्स को हल्का कर उन्हें हटाने में मदद करती है। एक छोटा सा कपड़ा लें और उस पर शहद लगाएं। कपड़े को स्ट्रेच मार्क्स वाले प्रभावित हिस्से पर रखें और तब तक लगा रहने दें जब तक वो सूख न जाए। गर्म पानी का इस्तेमाल कर उसे हटा लें। आप चाहें तो शहद में थोड़ा नमक और ग्लिसरीन डालकर स्क्रब भी बना सकती हैं और इसे भी स्ट्रेच मार्क्स पर लगा सकती हैं। इससे भी मार्क्स दूर करने में मदद मिलेगी।

  • ​कोको बटर या शिया बटर

    प्रेग्नेंसी के दौरान या उसके बाद दिखने वाले स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने में सबसे असरदार नुस्खा है कोको बटर या शिया बटर। इसे स्किन पर सीधे लगाने से स्किन हाइड्रेट होती है यानी स्किन में नमी की कमी दूर होती है और स्किन फर्म बनती है। अगर आप प्रेग्नेंसी के बाद इसे स्किन पर लगाती हैं तो कोको बटर में मौजूद एन्जाइम्स स्किन टीशू को हुए डैमेज को रिपेयर करने में मदद करता है।

  • ​एग वाइट या अंडे की सफेदी

    अंडे की सफेदी प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है जो स्किन के लिए भी फायदेमंद है। स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए अगर आप एग वाइट यूज कर रही हैं तो अंडे को तोड़ें और एग वाइट को अंडे के पीले वाले हिस्से से अलग कर लें। अब इस एग वाइट को सीधे स्ट्रेच मार्क्स वाले हिस्स पर लगाएं और कुछ देर के लिए लगा रहने दें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा करने से स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने में मदद मिलेगी।

  • ​आलू का रस भी है फायदेमंद

    आलू में पॉलिफेनॉल और फाइटोकेमिकल्स होता है जो स्किन के टेक्सचर को बेहतर बनाने में मदद करता है। आप चाहें तो आलू का रस निकालकर उसे स्ट्रेच मार्क्स वाले प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं। या फिर आलू को बीच से आधा काटें और उसे स्ट्रेच मार्क्स वाली जगह पर रगड़ें। इसे कुछ देर के लिए लगा रहने दें ताकि स्किन उसे अच्छी तरह से अब्जॉर्ब कर पाए। कुछ देर बाद गुनगुने पानी से उस हिस्से को साफ कर लें। कुछ ही दिनों में आपको अपने स्ट्रेच मार्क्स् में अंतर दिखने लगेगा।

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