premature menopause: मम्मी को सेहतमंद रखना चाहते हैं तो जानें Premature Ovarian Failure के बारे में, अब उन्हें देखभाल की जरूरत है – menopause and premature ovarian failure

Published By Garima Singh | एजेंसियां | Updated:

मेनॉपॉज से जुड़ी हैं ये सेहत संबंधी समस्याएंमेनॉपॉज से जुड़ी हैं ये सेहत संबंधी समस्याएं

जिन महिलाओं में 40 की उम्र या इससे पहले मेनॉपॉज यानी मंथली साइकिल आना बंद हो जाता है, उनमें कई तरह की क्रॉनिक डिजीज का खतरा भी बढ़ जाता है। खासतौर पर ये महिलाएं अपनी उम्र के 60वें दशक में कार्डियोवस्कुलर और डायबीटीज जैसी क्रॉनिक डिजीज के संपर्क में आती हैं। जाहिर तौर पर हम अपनी मदर को बीमार नहीं देखना चाहते लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ने लगती है वे कई तरह की बीमारियों से भी घिरने लगती हैं। खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर महिलाएं खुद नहीं जानती हैं कि उनके साथ आखिर हो क्या रहा है। अगर मूड स्विंग्स के साथ-साथ मम्मी की सेहत में कई तरह के बदलाव देखने को मिलें तो सतर्क हो जाइए। अब आपका समय है उनकी देखभाल करने का। ताकि वे एक हेल्दी ओल्डऐज इंजॉय कर सकें।

वहीं, जिन महिलाओं में मेनॉपॉज 50 से 55 साल की उम्र में होता है, उन्हें 60 साल की उम्र में हार्ट संबंधी बीमारियां और शुगर की बीमारी होने का खतरा तीन गुना तक कम हो जाता है। पूर्व में हुई स्टडीज के मुताबिक उच्च आय वाले देशों में मेनॉपॉज के बाद महिलाएं अपने जीवन के एक-तिहाई हिस्से को इंजॉय करती हैं। जबकि ‘ह्यूमन रीप्रॉडक्शन’ जर्नल में प्रकाशित हुई एक ताजा स्टडी में कुछ नई बातें सामने आई हैं। स्टडी ऑथर्स के मुताबिक, नैचरल तरीके से मेनॉपॉज के समय और मल्टीपल मेडिकल कंडीशंस की शुरुआत के बीच लिंक से जुड़ी यह अपनी तरह की पहली स्टडी है।

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प्रीमेच्यॉर मेनॉपॉज के कारण होनेवाली समस्याएं

शोध के लिए ऑस्ट्रेलियन नैशनल हेल्थ सर्वे द्वारा इक्ट्ठा किया गया पांच हजार से अधिक महिलाओं का टेडा उपयोग किया गया। इन महिलाओं ने 1996 से 2016 के बीच इस बात की सूचना दी कि क्या उन्हें डायबीटीज, स्ट्रोक, गठिया, डिप्रेशन, ञस्टियोपोरोसिस, अस्थमा या ब्रेस्ट कैंसर जैसी करीब 11 बीमारियों का सामना तो नहीं करना पड़ा। पूरे 20 साल किए गए इस अध्ययन में सामने आया कि जिन महिलाओं में प्रीमेच्योर मेनॉपॉज हुआ था, उनमें मल्टीमोर्बिडिटी यानी मेनॉपॉज के बाद होनेवाली एक से अधिक दिक्कतें देखने को मिलीं।

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मेनॉपॉज के बाद होने सकती हैं ये बीमारियां

क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, ब्रिस्बेन में सेंटर फॉर लॉन्गिट्यूडिनल ऐंड लाइफ कोर्स रिसर्च की निदेशक और इस शोध की सीनियर ऑर्थर गीता मिश्रा का कहना है कि हमारी रिसर्च में सामने आया है कि मल्टीमॉर्बिडिटी मिड ऐज और उम्रदराज महिलाओं में काफी कॉमन है। साथ ही प्रीमेच्यॉर मेनॉपॉज इन महिलाओं में मल्टीमॉर्बिडिटी की समस्या का रिस्क बढ़ा देता है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि जो महिलाएं प्राकृतिक तौर पर मेनॉपॉज की स्थिति से गुजर रही हों, उन्हें भी डॉक्टर्स से हेल्थ संबंधी गाइडेंस लेनी चाहिए। ताकि आगे चलकर सेहत से जुड़ी दूसरी समस्याओं का रिस्क कम किया जा सके।

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