Vaginal Discharge: Pregnancy Se Jure Sawal; Vaginal Discharge During Pregnancy Is Normal Know When Should You See A Doctor

प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ चीजें होना नॉर्मल है लेकिन कुछ संकेत खतरनाक हो सकते हैं लिहाजा प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कुछ ऐसा ही मामला प्रेग्नेंसी में वजाइनल डिस्चार्ज से जुड़ा भी है।

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9 महीने तक अपने होने वाले बच्चे को अपने गर्भ में पालने का ये सफर प्रेग्नेंसी बिलकुल भी आसान नहीं होता। हर प्रेग्नेंट महिला के लिए ये सफर खुशी और उत्साह के साथ-साथ कन्फ्यूजन और डर भी लेकर आता है। शरीर में होने वाले कौन से बदलाव नॉर्मल हैं और किन बदलावों को लेकर आपको चिंतित होने की जरूरत है। कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, इस तरह की बातों को लेकर अक्सर प्रेग्नेंट महिलाएं कन्फ्यूज रहती हैं और ऐसा ही एक मामला है प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले वजाइनल डिस्चार्ज का। कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान इस डिस्चार्ज का रंग बदल जाता है या फिर फ्रिक्वेंसी और थिकनेस में चेंज हो जाता है तो कौन सी स्थिति नॉर्मल है किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, यहां जानें।

हॉर्मोन्स का लेवल बढ़ने की वजह से होता है डिस्चार्ज

प्रेग्नेंसी के दौरान आमतौर पर ज्यादातर महिलाओं को वजाइना से डिस्चार्ज होता है जिसे ल्यूकोरिया कहते हैं। यह सफेद रंग का, बेहद पतला और थोड़ी सी गंध वाला होता है। इस तरह का डिस्चार्ज बिलकुल नॉर्मल है और इसे लेकर किसी तरह की परेशानी वाली बात नहीं है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर के पेल्विक एरिया वाले हिस्से में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है जिससे म्यूकस मेम्ब्रेन उत्तेजित हो जाते हैं और वजाइना से डिस्चार्ज होने लगता है। कई बार तो प्रेग्नेंसी के दौरान यह डिस्चार्ज बढ़ भी जाता है और पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान जारी रहता है।

50 से 80% महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान सूजन की दिक्कत

50 से 80% महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान सूजन की दिक्कत

जैसे-जैसे आपकी डिलिवरी डेट नजदीक आती जाती है शरीर में होने वाली ये सूजन प्रेग्नेंट महिला का और बुरा हाल कर देती है। करीब 50 से 80 प्रतिशत महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान सूजन की दिक्कत होती है और शाम के समय और गर्म मौसम में इस सूजन में बढ़ोतरी होने लगती है। हालांकि पैरों में होने वाली थोड़ी बहुत सूजन होना सामान्य सी बात है और घबराने की जरूरत नहीं। लेकिन हाथ और चेहरे पर होने वाली सूजन प्रीक्लैम्प्सिया का संकेत हो सकती है। प्रीक्लैम्प्सिया प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति को कहते हैं।

​कब दिखने लगती है सूजन?

– प्रेग्नेंसी में ज्यादा देर तक खड़े रहने से सूजन हो सकती है- बहुत ज्यादा काम करने या शरीर के थक जाने पर भी सूजन नजर आती है- बहुत ज्यादा कैफीन का सेवन करने से भी सूजन दिखने लगती है- खाने में नमक और सोडियम का ज्यादा इस्तेमाल करने और पोटैशियम का कम सेवन करने से भी सूजन नजर आने लगती है

​इन 4 वजहों से होती है सूजन– शरीर में होने वाले हॉर्मोनल चेंजेसप्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में प्रोजेस्टेरॉन, ऐस्ट्रोजन, एचसीजी और प्रोलैक्टिन जैसे कई हॉर्मोन्स का स्तर काफी बढ़ जाता है और इस वजह से भी एडिमा (सूजन) होने लगती है।- वजन बढ़नाप्रेग्नेंसी के दौरान इस 9 महीने के पीरियड में महिला का अच्छा खासा वजन बढ़ता है। बच्चे के बेहतर विकास के लिए वजन बढ़ना जरूरी भी है। इसके साथ-साथ शरीर में मौजूद एक्सट्रा फ्लूइड प्रेग्नेंसी में महिला के वजन का 25 प्रतिशत हिस्सा होता है।

ऐसे में वजन बढ़ने से भी पैरों में सूजन नजर आने लगती है।- नसों पर बढ़ता दबावगर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण शरीर की नसों पर दबाव बनने लगता है, जिस वजह से ब्‍लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। इस प्रकिया में खून के निचले अंगों से दिल तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न होती है, जिस कारण पैरों में सूजन शुरू हो जाती है।- हीमॉग्लोबिन की कमीप्रेग्नेंसी के दौरान कई बार शरीर में कम प्रोटीन और कम हीमॉग्‍लोबिन की वजह से भी सूजन नजर आने लगती है। कई मामलों में गर्भावस्‍था के दौरान पैर सामान्‍य नहीं हो पाते और उनमें लगातार सूजन बनी रहती है लेकिन डिलिवरी के बाद पैर सामान्य स्थिति में आ जाते हैं।


​सूजन दूर करने के उपायप्रेग्नेंसी के दौरान एक ही पोजिशन में बहुत देर तक खड़ी या बैठी न रहें। पोजिशन चेंज करें, पैरों को ऐक्टिव रखें। अगर बहुत देर से खड़ी हैं या चल रही हैं तो थोड़ा ब्रेक लें और आराम करें। अगर देर तक बैठी हैं तो हर घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें और पैरों में मूवमेंट लाएं। इससे भी सूजन कम हो जाएगी।

नमक का सेवन कम करेंप्रेग्नेंसी के दौरान हाथ पैर में होने वाली सूजन को कम करने का सबसे आसान उपाय है नमक का सेवन कम करें। दरअसल, नमक शरीर में मौजूद एक्सट्रा पानी को रोक कर रखता है। ऐसे में जब शरीर में पहले से इतना सारा वॉटर रिटेंशन हो रखा है ऐसे में ज्यादा नमक खाने से वॉटर रिटेंशन और बढ़ेगा। लिहाजा खाने में ऊपर से अतिरिक्त नमक का इस्तेमाल बिलकुल न करें।

पोटैशियम रिच डायट खाएंशरीर में तरल पदार्थों को बैलेंस करने में मदद करता है पोटैशियम। लिहाजा ऐसी चीजों का सेवन करें जिसमें पोटैशियम की मात्रा अधिक हो। केला, आलू, पालक, बीन्स, दही, दालें और साल्मन फिश में पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है। लिहाजा प्रेग्नेंसी में सूजन कम करने के लिए इन चीजों का सेवन करें।

कैफीन इनटेक कम करेंअगर आप चाय या कॉफी लवर हैं तो प्रेग्नेंसी के दौरान आपको अपनी इस आदत में बदलाव करने की जरूरत है। दरअसल, सोडियम की ही तरह कैफीन भी शरीर में तरल पदार्थों को रोक कर रखता है जिससे वॉटर रिटेंशन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए कैफीन इनटेक कम से कम करें।

पैरों की मालिश करवाएंपैरों की मसाज करवाने से भी आपको सूजन में राहत मिल सकती है। मसाज करने से एक जगह पर जो तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं उनमें सर्कुलेशन होता है जिससे सूजन कम करने में मदद मिलती है। आप चाहें तो पेपरमिंट या लैवेंडर के इसेंशल ऑइल से पैरों की मसाज कर रिलैक्स फील कर सकती हैं।

आरामदेह कपड़े और जूते पहनेंटाइट कपड़े, मोजे या जूत न पहनें। इससे शरीर में और ज्यादा टाइटनेस वाली फीलिंग आती है तो शरीर की सूजन बढ़ सकती है। इसलिए जहां तक संभव हो प्रेग्नेंसी के दौरान आरामदायक कपड़े, कंफर्टेबल शूज ही पहनें।

ये भी हैं वजाइनल डिस्चार्ज के कारण

जब कोई महिला प्रेग्नेंट हो जाती है तो उसके सर्विक्स में होने वाले बदलाव की वजह से वजाइना से डिस्चार्ज ज्यादा होने लगता है। जैसे-जैसे ड्यू डेट नजदीक आती जाती है सर्विक्स और वजाइना की दीवारें सॉफ्ट होने लगती हैं और महिला का शरीर और ज्यादा डिस्चार्ज करने लगता है ताकि किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचा जा सके। डिलिवरी और लेबर के नजदीक आने के साथ ही बच्चे का सिर भी सर्विक्स को दबाने लगता है और इस वजह से भी वजाइना से ज्यादा डिस्चार्ज होने लगता है।

इस तरह का डिस्चार्ज नहीं है नॉर्मल

अगर आपके वजाइना से होने वाले डिस्चार्ज का रंग सफेद की जगह पीला या हरे रंग का है, बहुत ज्यादा बदबूदार है और साथ में वजाइना में खुजली और रेडनेस की भी दिक्कत हो रही है तो ये सारे लक्षण इस बात का संकेत हैं कि आपको वजाइनल इंफेक्शन हो गया है। कई केसेज में हद से ज्यादा डिस्चार्ज होना या नॉर्मल डिस्चार्ज न होना सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का भी एक संकेत हो सकता है।

​गर्भावस्था में तुलसी खाएं या नहीं

​गर्भावस्था में तुलसी खाएं या नहींहर दिन सुबह खाली पेट तुलसी का एक पत्ता चबाने से सिरदर्द दूर होता है, फीवर में आराम मिलता है, गला खराब हो या फिर गले में दर्द हो रहा हो तो ये समस्या भी दूर कर देता है तुलसी का पत्ता। लेकिन क्या प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था में तुलसी का सेवन करना चाहिए। कोई कहता है कि प्रेग्नेंसी में तुलसी खाने का कोई नुकसान नहीं है तो किसी की मानें तो गर्भवती महिला को तुलसी का पता नहीं खाना चाहिए। आखिर क्या है सच, ये हम आपको बता रहे हैं गर्भावस्था में तुलसी खाने के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में।

​तुलसी खाने के फायदे-ब्लड क्लॉटिंग में मददगारतुलसी के पत्तों में विटमिन के भरपूर मात्रा में होता है जो प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे को सेफ करने में मदद करता है। विटमिन के ब्लड क्लॉट बनाता है जिससे ब्लड लॉस का खतरा कम होता है। साथ ही साथ प्रेग्नेंस महिलाओं को अधिक खून की जरूरत होती है और तुलसी के सेवन से शरीर में ब्लड सप्लाई बढ़ती है जिससे भ्रूण के विकास में मदद मिलती है।

अतिरिक्त खून बनाने में मददगारतुलसी में मौजूद फॉलेट शरीर में अतिरिक्त खून बनाने में मदद करता है जिसकी प्रेग्नेंसी के दौरान बेहद जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान अगर होने वाली मां के शरीर में खून की कमी हो जाए तो मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। लिहाजा तुलसी का सेवन यहां फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि तुलसी के सेवन से शरीर में खून ज्यादा बनने लगता है।

​अनीमिया होने से रोकती है तुलसीतुलसी के पत्ते आयरन का भी बेहतरीन सोर्स हैं और आयरन के सेवन से खून में हीमॉग्लोबिन का स्तर बढ़ता है, रेड ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ती है जिसकी प्रेग्नेंसी में बहुत ज्यादा जरूरत होती है। लिहाजा तुलसी के सेवन से प्रेग्नेंसी के दौरान अनीमिया होने का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही साथ तुलसी के सेवन से एनर्जी भी मिलती है जिससे थकान नहीं होती।

इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगारतुलसी में विटमिन ई, सी, राइबोफ्लेविन, नियासिन और कई दूसरे विटमिन्स भी पाए जाते हैं और साथ ही इसमें जिंक, फॉस्फॉरस, कॉपर, मैग्नीशियम आदि भी होते हैं जिस वजह से तुलसी हमारी इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाकर इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है तुलसी जिससे प्रेग्नेंसी हेल्दी रहती है और गर्भ में पल रहा बच्चा भी।

​तुलसी खाने के नुकसान- गर्भाशय में सिकुड़न हो सकती हैतुलसी का सेवन करने से कई बार यूट्रस यानी गर्भाशय में कॉन्ट्रैक्शन्स यानी सिकुड़न और मरोड़ आने लगती है। लेकिन इस बारे में अब तक किसी भी स्टडी में कोई बात साफतौर पर सामने नहीं आयी है। शायद यही वजह है कि बहुत से डॉक्टर्स प्रेग्नेंट महिलाओं को तुलसी का सेवन बिलकुल न करने की सलाह देते हैं।

​शुगर लेवल हो सकता है कमदरअसल, तुलसी के पत्ते का अगर बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो इससे शरीर में हानिकारक हाइपोग्लाइसिमिक इफेक्ट हो सकते हैं यानी साधारण शब्दों में समझें तो बहुत ज्यादा तुलसी खाने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल की कमी हो सकती है। जिस वजह से चक्कर आ सकते हैं, इरिटेशन फील हो सकता है और घबराहट भी महसूस हो सकती है।

​सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैंतुलसी में यूजेनॉल होता है जिस वजह से हार्ट रेट बढ़ सकता है, मुंह में छाले हो सकते हैं, चक्कर आ सकता है और शायद इस वजह से भी डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को तुलसी का सेवन करने से मना करते हैं।

कब करें डॉक्टर से संपर्क?

जब भी ऐसा लगे कि प्रेग्नेंसी के दौरान आपका वजाइनल डिस्चार्ज नॉर्मल नहीं है, ऊपर बताए गए लक्षण अगर खुद में नजर आने लगें तो तुरंत अपनी गाइनैकॉलजिस्ट से संपर्क करें। इस तरह के मामलों में सेल्फ मेडिकेशन खतरनाक हो सकता है। कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान स्पॉटिंग की दिक्कत भी नॉर्मल हो सकती है, बावजूद इसके आपको इसके बारे में डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। साथ ही साथ अगर आपको ब्लीडिंग नजर आए, पेट में दर्द या क्रैम्प्स हों तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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