bleeding during pregnancy: प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग और स्पॉटिंग हो तो घबराएं नहीं, हो सकती हैं ये बातें – if you experience spotting or bleeding during pregnancy do not panic these could be the reason

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Published By Neha Seth | 360healthyways.com | Updated:

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मां बनना किसी भी औरत के लिए दुनिया के सबसे बेस्ट एक्सपीरियंस में से एक होता है। अपने बच्चे को 9 महीने तक गर्भ में पालना कोई आसान काम नहीं है। इस दौरान शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं और कई तरह के अच्छे और बुरे हर तरह के अनुभव का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर आप प्रेग्नेंट हैं और हल्की सी भी ब्लीडिंग या स्पॉटिंग नजर आए तो किसी का भी परेशान और पैनिक होना लाजिमी है। हालांकि इस स्पॉटिंग का मतलब जरूरी नहीं कि आपकी प्रेग्नेंसी में कुछ गलत हो गया है। ऐसी कई महिलाएं होती हैं जिन्हें पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होती रहती है बावजूद इसके वे एक हेल्दी बच्चे को जन्म देती हैं।

प्रेग्नेंसी के 12 हफ्तों तक 25% महिलाओं को होती है स्पॉटिंग

डॉक्टर्स और गाइनैकॉलजिस्ट्स की मानें तो प्रेग्नेंसी के पहले ट्राइमेस्टर यानी शुरुआती 3 महीने में हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना बेहद कॉमन और नॉर्मल सी बात है। करीब 25 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी के 12 हफ्तों तक हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग का अनुभव होता है। 2010 की एक स्टडी की मानें तो प्रेग्नेंसी के छठे और सातवें हफ्ते में बेहद कॉमन बाता है। लेकिन होने वाली मांएं अक्सर ऐसी चीजें देखकर घबरा जाती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली स्पॉटिंग का रंग और फ्लो दोनों ही मेन्स्ट्रुअल पीरियड के दौरान होने वाली ब्लीडिंग से हल्का होता है या फिर कई बार डार्क ब्राउन कलर का भी हो सकता है और महज एक-दो ड्रॉप खून ही नजर आता है।

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प्रेग्नेंसी में स्पॉटिंग की वजहें

गर्भावस्था के दौरान हल्की ब्लीडिंग और स्पॉटिंग दिखने की कई वजहें हो सकती हैं-

– जब भ्रूण होता है इम्प्लांट

फर्टिलाइजेशन यानी गर्भधारण होने के 10 से 12 दिन के बाद जब भ्रूण यूट्रस में इम्प्लांट होने लगता है उस दौरान भी हल्की ब्लीडिंग होती है जिसे पीरियड्स समझा जा सकता है। लेकिन ये मुश्किल से 2 या 3 दिन तक ही रहता है, पीरियड्स की तरह 5 से 7 दिन नहीं।

– वजाइनल इंफेक्शन

कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को वजाइना में इंफेक्शन भी हो जाता है जिस वजह से हल्का ब्लड स्पॉट नजर आ सकता है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान किसी महिला को यीस्ट इंफेक्शन हो जाए तो उन्हें सर्वाइकल ब्लीडिंग महसूस हो सकती है।



– सेक्शुअल इंटरकोर्स


प्रेग्नेंसी के दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में सर्विक्स में सूजन आ जाती है क्योंकि शरीर के इस हिस्से में ब्लड सप्लायी बढ़ जाती है। इस दौरान अगर आप पार्टनर संग इंटिमेट होती हैं या किसी भी तरह की सेक्शुअल गतिविधि करती हैं तो इस वजह से भी हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो सकती है।

– मिसकैरिज का खतरा

हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान थोड़ी बहुत स्पॉटिंग हो तो घबराने की जरूरत नहीं लेकिन कई बार ब्लीडिंग और स्पॉटिंग बेहद गंभीर भी बन जाती है और वो वजह है मिसकैरिज। आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 13 हफ्ते में मिसकैरिज होता है। ऐसे में अगर स्पॉटिंग के साथ हेवी क्रैम्प्स और नॉर्मल पीरियड्स से भी ज्यादा ब्लीडिंग होने लग जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि ये मिसकैरिज का संकेत हो सकता है।

​घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करने से पहले जान लें

  • ​घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करने से पहले जान लें

    प्रेग्नेंसी आपके लिए सरप्राइज की तरह आयी हो या फिर आप लंबे समय से प्रेग्नेंट होने की कोशिश कर रही हों…दोनों ही सूरत में प्रेग्नेंसी टेस्ट करना किसी भी लड़की या महिला के लिए स्ट्रेस से भरा हो सकता है। टेस्ट नेगेटिव होगा, पॉजिटिव होगा…ये सारी टेंशन दिमाग में चलती रहती है। ऐसे में प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का सही समय क्या है और घर पर किए जाने वाले होम प्रेग्नेंसी टेस्ट से जुड़ी अहम बातें, यहां जानें।

  • ​कब करना चाहिए प्रेग्नेंसी टेस्ट?

    आमतौर पर मिस्ड पीरियड्स या पीरियड में होने वाली देरी प्रेग्नेंसी की ओर इशारा करती हैं और आप प्रेग्नेंसी टेस्ट करने के लिए हड़बड़ा जाती हैं। लेकिन ये टेस्ट करने से पहले आपको कुछ समय का इंतजार जरूर करना चाहिए। सेक्स करने के 1 या 2 हफ्ते बाद या फिर पीरियड्स मिस होने के 10 दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट करना आपके लिए बेहतर होगा।

  • ​...ताकि मिल सके सही रिजल्ट

    प्रेग्नेंसी कंफर्म करने के लिए वेटिंग टाइम जरूरी है क्योंकि प्रेग्नेंसी हॉर्मोन एचसीजी (hCG) को डिटेक्ट करना होता है और यह आमतौर पर इम्प्लांटेशन साइकल के पूरा होने या एग के फर्टिलाइज होने के 7 से 12 दिन के अंदर होता है। एक बार ऐसा हो जाए फिर ये प्रेग्नेंसी हॉर्मोन हर 48 घंटे में दोगुना होने लगता है और फिर टेस्ट करने पर सही नतीजे पता चलते हैं।

  • ​सुबह-सुबह टेस्ट करना है ज्यादा फायदेमंद

    एक्सपर्ट्स की मानें तो दिन या रात की बजाए सुबह-सुबह उठते के साथ पहले यूरीन के साथ होम प्रेग्नेंसी टेस्ट करना सबसे सही माना जाता है और इसके नतीजे सबसे ऐक्युरेट आने की संभावना रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि रात की तुलना में सुबह के यूरीन में एचसीजी हॉर्मोन की अधिकता होती है। साथ ही साथ टेस्ट करने से पहले ज्यादा पानी न पिएं वरना टेस्ट के नतीजे पर इसका असर पड़ सकता है।

  • ​ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाएं

    आमतौर पर घर पर किया जाने वाला प्रेग्नेंसी टेस्ट तो यूरीन टेस्ट होता है लेकिन आप चाहें तो प्रेग्नेंसी को कंफर्म करने के लिए ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट भी करवा सकती हैं। खासकर तब जब आपको होम प्रेग्नेंसी टेस्ट में आपको बहुत ज्यादा नेगेटिव आ रहा हो लेकिन आप कंफर्म हों कि आप प्रेग्नेंट हैं। ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट, घर पर किए जाने वाले यूरीन प्रेग्नेंसी टेस्ट की तुलना में ज्यादा सेंसेटिव और सही नतीजे देते हैं।

  • ​हेल्थ प्रॉब्लम है तो कराएं ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट

    वैसी महिलाएं जो पहले मिसकैरिज या प्रेग्नेंसी से जुड़ी कोई दूसरी दिक्कतें झेल चुकी हैं और उन्हें हेल्थ से जुड़े दूसरे रिस्क का सामना करना पड़ा है उनके लिए भी ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट सही रहता है। ऐसा करने से प्रेग्नेंसी के शुरुआती हफ्ते में भी होने वाले बच्चे पर पूरी निगरानी रखी जा सकेगी।

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